24-Feb-2025
जलवायु जोखिम सूचकांक (CRI) 2025
विविध
चर्चा में क्यों?
अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण थिंक टैंक 'जर्मनवाच' ने जलवायु जोखिम सूचकांक (CRI) 2025 जारी किया है
जलवायु जोखिम सूचकांक 2025 क्या है?
- परिचय: मानवीय और आर्थिक क्षति को ध्यान में रखते हुए चरम मौसम की घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर देशों को रैंक किया जाता है।
- आवृत्ति: वर्ष 2006 से प्रतिवर्ष प्रकाशित, पिछले 30 वर्षों के आँकड़ों का विश्लेषण।
- मानदंड: छह संकेतकों का मूल्यांकन करता है, जिनमें मृत्यु दर, आर्थिक नुकसान और प्रभावित लोगों की संख्या शामिल है।
मुख्य निष्कर्ष
- 765,000 से अधिक मौतें और 4.2 ट्रिलियन डॉलर की हानि (1993-2022)।
- बाढ़, सूखा और तूफान के कारण वैश्विक विस्थापन हुआ।
- डोमिनिका, चीन और होंडुरास सबसे अधिक प्रभावित हुए (1993-2022)।
- वर्ष 2022 में पाकिस्तान, बेलीज़ और इटली सबसे अधिक प्रभावित हुए।
- सबसे अधिक प्रभावित 10 देशों में से 7 निम्न एवं मध्यम आय वाले देश (LMIC) हैं।
भारत का प्रभाव
- 80,000 मौतें (वैश्विक मौतों का 10%) और 180 बिलियन डॉलर का नुकसान (वैश्विक स्तर पर 4.3%) के साथ 6वाँ सबसे अधिक प्रभावित स्थान (1993-2022)।
- भीषण बाढ़ (1993, 2013, 2019), लू (1998, 2002, 2003, 2015 में ~50°C) तथा गुजरात (1998), ओडिशा (1999), हुदहुद (2014) और अम्फान (2020) जैसे चक्रवातों का सामना किया।
- एशिया-प्रशांत जलवायु रिपोर्ट 2024 में यह चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण भारत को वर्ष 2070 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद का 24.7% हानि का सामना करना पड़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन शमन में चुनौतियाँ
- ऐतिहासिक उत्सर्जन बनाम वर्तमान उत्तरदायित्व: विकसित देश भारत और चीन जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अधिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
- तापमान सीमा का उल्लंघन: वर्ष 2024 में एक पूरे वर्ष के लिये 1.5°C वैश्विक तापमान सीमा पार कर ली गई।
- दुर्बल प्रतिबद्धताएँ: कई देशों ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को अद्यतन नहीं किया है, जिससे 2100 तक 2.6-3.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि का खतरा है।
- वित्तपोषण का अंतर: विकासशील देशों के लिये वार्षिक 300 बिलियन डॉलर का जलवायु कोष अपर्याप्त है तथा हानि एवं क्षति कोष में देरी के कारण सहायता में बाधा उत्पन्न होती है।